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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ऑनलाइन महफिल

ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, सभी को अपनो के फोटोज को मंगवाने की दिल  में पहली बार प्यास जगी है, हर एक के मोबाईल की गैलेरी में स्क्रिन शॉट की  लिस्ट बढ़ी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, दूरियों से ही महफ़िले मोबाइल को  रंगीन बनाने की होड़ लगी हैं, अपलोड की गई Pic के लिए, मैसेज से , दिल के भावों को दर्शाने की जुगत लगी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, गिले -शिकवे सब दूर होंगें, रूठे अपने यार मनेंगें, इस महफ़िल में रिश्तों के रिपेयरिंग के बेतार साज की राग बजी हैं, बहुत दिनों से बिछड़े  अपने  प्यारों और परिजनों से दिल खोलकर बातों-मुलाकातों के दौर की महफ़िल सजी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं हैं खुशनसीबी हमारी की इंविटेशन तो हमको भी मिला हैं उसी के लिए तो हमने भी इस रचना को लिखा हैं महफ़िले मोबाइल में सभी के कॉन्टेक्ट लिस्ट बड़ी हैं, तो आइए फिर शिरकत करें ,देर न होजाये बहुत लंबी लाइन लगी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं,

मोहब्ब्त से मारा

सनम हमको तुमने मोहब्बत से मारा हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा यादें तुम्हारी ,ख्वाब भी तुम्हारा हो तुम्हारी ही बाहों में ये तन भी हमारा सनम हमको......                        हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा बाते तुम्हारी , तुम्हारा फसाना हमको तो  सुहाता हैं सनम जिक्र भी सिर्फ तुम्हारा सनम हमको......                      हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा आँखे तुम्हारी,  चेहरा तुम्हारा हमारा तो जीना भी  हैं अब तबस्सुम तुम्हारा सनम हमको.......                       हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा सनम हमको तुमने मोहब्ब्त से मारा हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा