दहेज व बहुओं पर अत्याचार! नमस्कार सभ्य समाज के सभी आत्मजों से🙏 मुझे बचपन से ही बहुत बुरा लगता रहा हैं ये सुनकर की जब बेटी जन्म लेती हैं तो उसके घर वाले बस एक ही चिंता में चिंतित रहते हैं कि कैसे पर्याप्त दहेज की व्यवस्था की जाए ताकि बेटी को अच्छे घर में ब्याह सकें! दूसरी तरफ जिनके घर बेटा जन्म लेता हैं वहां चर्चा चलती सुनी थी कि आपके क्या चिंता की बात हैं आपके तो घर बैठे लोग दे कर जाएंगे (दहेज ही ) हाँ बस शर्त ये की लड़का सरकारी जॉब होना चाहिए उसकी रैंक के अनुसार बोली लगेगी! या फिर बहुत धन दौलत वाले पिता का बेटा हैं तब भी चांस हैं दहेज मिलने के। पहले माता पिता लड़कियां कम पढ़ाते थे, फिरऔर कुछ पढ़ाने लगे, फिर अच्छी एजुकेशन दिलवाने लगे मकसद ये की क्या जरूरत हैं लड़की को पढ़ाने की! वो तो वैसे भी चूल्हा संभालेगी ,फिर कुछ पढ़ाने लगे कि चलो ठीक ठाक रिश्ता मिल जाएगा थोड़ी पीढ़ी लिखी होने से! फिर लड़कों की डिमांड होने लगी पढ़ी लिखी होनी चाहिए बीवी तो क्योंकि उनको अपना स्टेटस मेंटेन करना होता हैं तो लड़की के पेरेंट्स भी ऊँची हैसियत के लड़कों से शादी के लिए उच्च शिक्षा दिलवाने लगे बेटियों ...