नई सुबह
वो सुबह भी आयेगी!
की जब होंगे दूर अंधेरे गमों के,
और छटेंगे बादल दर्द भरी आहों के
हाँ वो सुबह कभी तो आयेगी!!....
वो सुबह भी आयेगी
की जब पड़ेगी चेहरे पर उजली उषा के ओस की बूंदों के छिंटे और नमक आसुंओ का धूल जायेगा,
हाँ वो सुबह कभी तो आयेगी!!....
वो सुबह भी आयेगी
की जब तन-मन पर बौछार करेंगी किरणें भानु- भाष्कर के प्रकाश की
और होठों पर खिलेंगी कलियाँ मुस्कराकर खिलखिलाने के साज के आगाज की
हाँ वो सुबह कभी तो आयेगी!!....
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