मन की हलचल

 ये मन भी बहुत विचित्र होता हैं ! जाने कहाँ कहाँ से इसमे विचारों के मेहमान आ जाते हैं ,आते हैं तो आये जी !लेकिन आ करके बसने लगते हैं !मन ही में ,और फिर बैचेन करने लग जाते हैं मन को ,कितना रोकने की करूँ कोशिशें की कोई अनचाहा विचार रूपी मेहमान चला जाये वापस ! लेकिन वो जाएगा तब ही जब पूरी तरह से मन ही उसकी और देखना बन्द करदे ! और यही तो मन को भी करने में  ही अपने आप को समझना बड़ा कठिन होता हैं , कभी कभी तो इस मन में ऐसे ऐसे मेहमान चले आते हैं जिनके बारे में कभी सोचा ही नही मन ने भी की उसे ऐसे भी ख्याल आ सकते हैं !  और उन्ही ख्यालों से जीवन की दशा-दिशा ही परिवर्तित हो जाती हैं ,मन मे घर ही बसा लेते हैं कोई विचार तो ! कभी कोई विचार तो ऐसी हमचल मचा देते हैं दिलोदिमाग में की पूरा अस्तित्व ही बदल जाता हैं व्यक्ति का ,व्यक्तित्व ही परिवर्तित होजाता हैं ! मन में जरूरी नही की हर समय गलत ही या नकारात्मकता वाले ही मेहमान आते हैं विचारों के !पोजेटिव  विचारों के मेहमान भी पधारते हैं मन मे!

और उन्ही के कारण ही व्यक्ति कुछ अच्छा और रचनात्मक कर जाता हैं।
ये मन हैं साहब!मन !बहुत बारीकियों के साथ इसकी हलचलों को समझना पड़ता हैं जीवन में , बहुत तूफान उठा लेता हैं मन पूरे अस्तित्व में ही मानव के ! मन ही से व्यक्ति जीत जाता हैं सब कुछ और अगर मन ही हर जाये तो वयक्ति को नैराश्य अपने आगोश ले जाता हैं व्यक्ति को ,मन अगर शांन्त भी हैं तब भी इसके भीतर की हलचल पर नजर  बचकरके कब विचारों के मेहमान आ  जाये पता ही नही चलता मानव को ,ये मन ही के विचार तो ,प्यार,नफरत,गुस्सा,वैमनष्यता आदि कितने ही भाव व्यक्ति में बर्ददत करता हैं विचारी के मेहमानों से !इसलिए मन की हमचलों पर हमें पूरा घ्यान देते रहना होता हैं क्योकि इन्हीं मन की हलचलों से हमारा आज चलता हैं और आने वाला कल भी तो मन के ही भीतर की हलचलों का परिणाम होगा !

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