संदेश

रूठने का हक

रूठ जाऊँ तुमसे किसी बात पर मैँ गर,मनाने की चाहत भी रखूँ कैसे तुमसे ! तुमने रूठने का हक भी तो नही दिया है तुमसे! आ सकते तुम पास नहीं मेरे जब मिलने को  दिल तड़पता हैं मेरा तुमसे!   तुमने  पास आ करके मुझे मिलने  का हक भी तो नहीं दिया हैं तुमसे ! करवटें बदलते रातों में तकिए से लिपट जाते हैं , दिलमें जगे अहसासों को दबाते हैं, उन्हें कैसे जाहिर करें तुमसे! तुमने  दिल के अरमानों को जाहिर करने को लिपटने का हक भी तो नहीं दिया है तुमसे! करने को हजारों बातें दिल में बेताब हैं मगर कोई शिकायत नहीं करनी हैं तुमसे! तुमने दिल के जज्बातों को बयां करने हक भी तो नहीं दिया हैं तुमसे!

मेरी बेटी

😍मेरे नारी रूप को सम्पूर्ण करने बेटी तू आई मुझे परिपूर्ण करने,  आज ही के दिन तो कोख से मेरी जन्म लिया, कन्या रूप में शक्ति ने मेरी गोद को सुसज्जित किया, बिटिया तेरी वाणी ने मुझे माँ के  नाम से  उपकृत किया! देख कर तेरे चेहरे को मेरे कष्टों मैं भूल गई! तुझे बाहों में भरकर  ममता  मेरी निहाल हुई!                प्यारी बेटी 😊😍

मैं भारत हूँ

मैं भारत हूँ ! दुश्मनी करना मेरी फितरत में भी हैं नहीं, लेकिन जो करते मुझसे दुश्मनी उनको नष्टेनाबूद करने से भी मैं पीछे हटता नहीं ! मैं भारत हूँ ! हाथ केवल  मैं दोस्ती के लिए ही पहले आगे बढ़ता हूँ लेकिन जो हाथ  वार करे मेरी पीठ पर ,उन हाथों को उनके कंधों से ही मैं उखाड़ लेता हूँ मैं भारत हूँ! शांति और प्यार की बदौलत में दुनिया मैं जाना जाता हूँ लेकिन जो मेरी शांति और प्यार को  मेरे आशुओँ में बदलना चाहें ! उनको नाकों -चने- चबवाने भी मैं जानता हूँ मैं भारत हूँ! बस  भारत ही हूँ मैं ! और मेरी ताकत भी मैं जानता हूँ लेकिन जो कमजोर समझ कर वार करते हैं मुझपर उनको अपनी फौलादीऔकात  दिखाना भी मैं जानता हूँ मैं भारत हूँ ! मेरे बच्चों की मैँ शान हूँ  लेकिन मेरे ही बच्चों से मैं भारत महान हूँ