संदेश

आरक्षण का भष्मासुर

  आरक्षण या भष्मासुर 🙏नमस्कार सभी समाज के और वर्गों के माननीय सदस्यों को जो मेरे विचारों को पढ़ने की कृपा करेंगे और अपने सुझाव भी देंगे , मैं आज इस मंच के माध्यम से आरक्षण के सम्बंद में अपने विचार व्यक्त करना चाहती हूँ, क्योंकि इस आरक्षण रूपी भष्मासुर ने अब हमें अपने आप के साथ ही पूरे देश में रक्तबीज की तरह से फैलाना शुरू कर दिया है, हमारे देश के महानुभावों ने सायद सभी समाज के तबकों को और जातियों को बराबर उनत्ति के लिए इस आरक्षण की कुछ वर्षो तक व्यवस्था की थी ,लेकिन आज हालात क्या हैं ?आप सभी अच्छे से जानते हैं ,हाँ परवाह नहीं करते ये अलग बात हैं या कुछ देर इस पर बात करके रह जाते हैं और राजनीतिज्ञों की व राजनितिक पार्टियों की बुराई भर करके रह जाते हैं ! मैं आपसे जानना चाहती हूँ और खास कर उन भाइयों और बहनों से की क्या आज के इस वैश्वीकरण के युग में भी हमें यूँ वर्गीकृत और चयनित लाभ सरकारों से लेने की आवश्यकता क्यों हैं !क्यों हम अपने आप को अभी तक कमजोर वर्ग ही साबित किये हुए और उससे मिलने वाली खैरात के लिए अपने अपनो का खून बहाने में भी नही हिचकिचाते हैं देश की सार्वजनिक संम्पति को तो ...

रिश्ता

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यकीन

इतना यकीन हमने तुझ पर किया, केयकीन से भी अब तो यकीन उठने चला..  खुदा से भी  बढकर हमने, तेरी मोहब्बत की इतनी ईबादत की  के अब तो इबदतों से भी यकीन उठने चला..  अपना बनाकर अपनों से हमने इतनी यातनाएं सही के दुश्मनों से भी ज्यादा अब तो दोस्तों से यकीन उठने चला   तेरी  चाहत पर खुद को मिटाकर मोहब्बत की हद से    बढ़कर मोहब्बत ऐसी  तुझसे अलहदा हमने की   के अब तो इस जहां में मोहब्बत से यकीन उठने चला

आप हो तो मैं हूँ : ऑनलाइन महफिल

आप हो तो मैं हूँ : ऑनलाइन महफिल : ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, सभी को अपनो के फोटोज को मंगवाने की दिल  में पहली बार प्यास जगी है, हर एक के मोबाईल की गै...

ऑनलाइन महफिल

ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, सभी को अपनो के फोटोज को मंगवाने की दिल  में पहली बार प्यास जगी है, हर एक के मोबाईल की गैलेरी में स्क्रिन शॉट की  लिस्ट बढ़ी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, दूरियों से ही महफ़िले मोबाइल को  रंगीन बनाने की होड़ लगी हैं, अपलोड की गई Pic के लिए, मैसेज से , दिल के भावों को दर्शाने की जुगत लगी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं, गिले -शिकवे सब दूर होंगें, रूठे अपने यार मनेंगें, इस महफ़िल में रिश्तों के रिपेयरिंग के बेतार साज की राग बजी हैं, बहुत दिनों से बिछड़े  अपने  प्यारों और परिजनों से दिल खोलकर बातों-मुलाकातों के दौर की महफ़िल सजी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं हैं खुशनसीबी हमारी की इंविटेशन तो हमको भी मिला हैं उसी के लिए तो हमने भी इस रचना को लिखा हैं महफ़िले मोबाइल में सभी के कॉन्टेक्ट लिस्ट बड़ी हैं, तो आइए फिर शिरकत करें ,देर न होजाये बहुत लंबी लाइन लगी हैं ऑनलाइन महफ़िल सजी हैं भूली बिसरी यादें जगी हैं,

मोहब्ब्त से मारा

सनम हमको तुमने मोहब्बत से मारा हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा यादें तुम्हारी ,ख्वाब भी तुम्हारा हो तुम्हारी ही बाहों में ये तन भी हमारा सनम हमको......                        हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा बाते तुम्हारी , तुम्हारा फसाना हमको तो  सुहाता हैं सनम जिक्र भी सिर्फ तुम्हारा सनम हमको......                      हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा आँखे तुम्हारी,  चेहरा तुम्हारा हमारा तो जीना भी  हैं अब तबस्सुम तुम्हारा सनम हमको.......                       हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा सनम हमको तुमने मोहब्ब्त से मारा हो तुम्हारे शिवा कैसे जीना हमारा      

रूठने का हक

रूठ जाऊँ तुमसे किसी बात पर मैँ गर,मनाने की चाहत भी रखूँ कैसे तुमसे ! तुमने रूठने का हक भी तो नही दिया है तुमसे! आ सकते तुम पास नहीं मेरे जब मिलने को  दिल तड़पता हैं मेरा तुमसे!   तुमने  पास आ करके मुझे मिलने  का हक भी तो नहीं दिया हैं तुमसे ! करवटें बदलते रातों में तकिए से लिपट जाते हैं , दिलमें जगे अहसासों को दबाते हैं, उन्हें कैसे जाहिर करें तुमसे! तुमने  दिल के अरमानों को जाहिर करने को लिपटने का हक भी तो नहीं दिया है तुमसे! करने को हजारों बातें दिल में बेताब हैं मगर कोई शिकायत नहीं करनी हैं तुमसे! तुमने दिल के जज्बातों को बयां करने हक भी तो नहीं दिया हैं तुमसे!

मेरी बेटी

😍मेरे नारी रूप को सम्पूर्ण करने बेटी तू आई मुझे परिपूर्ण करने,  आज ही के दिन तो कोख से मेरी जन्म लिया, कन्या रूप में शक्ति ने मेरी गोद को सुसज्जित किया, बिटिया तेरी वाणी ने मुझे माँ के  नाम से  उपकृत किया! देख कर तेरे चेहरे को मेरे कष्टों मैं भूल गई! तुझे बाहों में भरकर  ममता  मेरी निहाल हुई!                प्यारी बेटी 😊😍

मैं भारत हूँ

मैं भारत हूँ ! दुश्मनी करना मेरी फितरत में भी हैं नहीं, लेकिन जो करते मुझसे दुश्मनी उनको नष्टेनाबूद करने से भी मैं पीछे हटता नहीं ! मैं भारत हूँ ! हाथ केवल  मैं दोस्ती के लिए ही पहले आगे बढ़ता हूँ लेकिन जो हाथ  वार करे मेरी पीठ पर ,उन हाथों को उनके कंधों से ही मैं उखाड़ लेता हूँ मैं भारत हूँ! शांति और प्यार की बदौलत में दुनिया मैं जाना जाता हूँ लेकिन जो मेरी शांति और प्यार को  मेरे आशुओँ में बदलना चाहें ! उनको नाकों -चने- चबवाने भी मैं जानता हूँ मैं भारत हूँ! बस  भारत ही हूँ मैं ! और मेरी ताकत भी मैं जानता हूँ लेकिन जो कमजोर समझ कर वार करते हैं मुझपर उनको अपनी फौलादीऔकात  दिखाना भी मैं जानता हूँ मैं भारत हूँ ! मेरे बच्चों की मैँ शान हूँ  लेकिन मेरे ही बच्चों से मैं भारत महान हूँ